एक सुंदर घाटी में सोमू नाम का एक मेहनती लकड़हारा रहता था। सोमू बहुत ही दयालु और ईमानदार था। उसका एक बड़ा भाई था, रघु, जो बहुत आलसी और लालची था। जहाँ सोमू अपनी मेहनत से खुश था, वहीं रघु हमेशा बिना काम किए अमीर बनने के सपने देखता था।
एक दिन जंगल में लकड़ी काटते समय, सोमू ने एक विशाल चट्टान के पास कुछ लोगों को देखा। उनके नेता ने एक जादुई मंत्र कहा: "खुल जा चाँदनी द्वार!" देखते ही देखते चट्टान खिसक गई और एक गुफा का रास्ता खुल गया। वे अंदर गए और नेता ने कहा, "बंद हो जा चाँदनी द्वार!", और रास्ता बंद हो गया। उनके जाने के बाद, सोमू ने भी वही मंत्र कहा और गुफा के अंदर चला गया। वहाँ सोने और रत्नों का ढेर लगा था। सोमू ने लालच नहीं किया और बस कुछ सिक्के लेकर घर आ गया।
जब रघु को यह पता चला, तो वह लालच में अंधा होकर गुफा की ओर भागा। उसने मंत्र पढ़ा और अंदर चला गया। सोने को देखकर वह खुशी से झूम उठा, लेकिन वह बाहर निकलने का मंत्र भूल गया! वह अंदर फंस गया। तभी, वे चोर, जो उस गुफा के मालिक थे, वहाँ पहुँच गए।
सोमू की समझदार सहायक, मल्लिका, ने देखा कि चोर सोमू के घर को निशाना बना रहे हैं। चोरों ने सोमू के घर को पहचानने के लिए एक खास निशान बनाया। मल्लिका ने तुरंत चतुराई दिखाई और गाँव के हर घर पर वैसा ही निशान बना दिया, जिससे चोर उलझ गए। जब चोरों ने छिपकर हमला करने की कोशिश की, तो मल्लिका ने अपनी बुद्धि से उन्हें नाकाम कर दिया और सोमू के परिवार को बचा लिया। सोमू ने मल्लिका की बहादुरी के लिए उसे बहुत पुरस्कार दिया।
Moral
लालच मुसीबत लाता है, जबकि बुद्धिमानी और ईमानदारी सुरक्षा प्रदान करती है।