एक घने जंगल के किनारे एक छोटा सा देवदार का पेड़ रहता था। वह हमेशा अपने आस-पास के ऊंचे पेड़ों को देखकर दुखी रहता था। वह अक्सर बुदबुदाता, "मैं इतना छोटा क्यों हूँ? कोई भी मुझे अपने घर की सजावट के लिए नहीं चुनेगा। मैं इन दिग्गजों के बीच कितना मामूली हूँ!"
बड़े पेड़ उसे समझाते, "धैर्य रखो नन्हे दोस्त, तुम्हारी भी अपनी सुंदरता है," लेकिन वह पेड़ अपनी कमी पर ही रोता रहता था।
एक सुबह, एक माली वहां आया। उसने बड़े और शानदार पेड़ों को काटकर अपनी गाड़ी में भरना शुरू किया। छोटे पेड़ को लगा, "चलो अच्छा है, मैं छोटा हूँ इसलिए वह मुझे छोड़ देगा।" लेकिन माली ने उस छोटे पेड़ को भी देखा और उसे भी अपनी गाड़ी में रख लिया।
कुछ देर बाद, एक परिवार वहां आया। वे बड़े पेड़ ढूंढ रहे थे, लेकिन एक छोटा बच्चा सीधा उस नन्हे पेड़ के पास गया और बोला, "माँ, मुझे यही पेड़ चाहिए! यह कितना प्यारा और छोटा है!"
बच्चे की खुशी देखकर माँ ने वह छोटा पेड़ खरीद लिया।
घर पहुँचकर, बड़े पेड़ों को सजाना बहुत मुश्किल काम था, क्योंकि वे बहुत ऊँचे थे। लेकिन उस नन्हे पेड़ के साथ ऐसा नहीं था। बच्चे ने अपने दोस्तों के साथ मिलकर उस पेड़ की टहनियों पर रंग-बिरंगी लाइटें और छोटे-छोटे सितारे लटकाए। पेड़ छोटा होने के कारण बच्चों को सीढ़ी की ज़रूरत नहीं पड़ी; वे आसानी से उसे सजा सके।
देखते ही देखते, वह छोटा पेड़ रोशनी से जगमगा उठा। पड़ोस के लोग भी उसकी सुंदरता देखकर दंग रह गए। तब उस नन्हे पेड़ को समझ आया कि उसका छोटा होना कोई कमी नहीं थी, बल्कि वह बच्चों की खुशी के लिए ही बना था।
Moral
खुद की तुलना दूसरों से न करें; आप जैसे हैं, वैसे ही खास हैं।