एक सुंदर घाटी में लूना नाम की एक राजकुमारी रहती थी। वह न केवल दयालु थी, बल्कि प्रकृति और पशुओं से भी बहुत प्रेम करती थी। उसका बगीचा हमेशा खुशियों से महकता रहता था।
लेकिन, महल में काम करने वाली माया नाम की लड़की को लूना से बहुत जलन होती थी। माया एक दुष्ट जादूगरनी की पोती थी। उसने अपनी दादी से लूना को सबक सिखाने की योजना बनाई।
जादूगरनी ने एक रहस्यमयी काला गुलाब बनाया। उसने चेतावनी दी, "यह फूल देखने में बहुत सुंदर है, लेकिन जो भी इसे पहनेगा, वह इसके भीतर कैद हो जाएगा।"
एक दिन, जब लूना अपने बगीचे में टहल रही थी, माया उसके पास आई और एक सुंदर काला गुलाब देते हुए कहा, "राजकुमारी, यह दुर्लभ गुलाब खास आपके लिए है।"
गुलाब की सुंदरता देख लूना ने उसे अपने बालों में लगा लिया। अचानक, एक जादुई धुंध उठी और लूना उस गुलाब के भीतर समा गई। हवा के एक तेज़ झोंके ने उस जादुई गुलाब को उड़ाकर एक घने जंगल में फेंक दिया।
कई साल बीत गए। कविन नाम का एक राजकुमार जंगल में घूम रहा था, तभी उसे एक चमकता हुआ काला गुलाब दिखा। वह उसे अपने महल लाया और अपने बगीचे में लगा दिया। उसने माली को उसकी देखभाल करने को कहा, लेकिन बहुत पानी देने के बाद भी वह पौधा नहीं बढ़ा। कविन बहुत दुखी हुआ।
एक शाम, कविन ने खुद उस पौधे को पानी देने का फैसला किया। जैसे ही उसने प्यार से पानी डाला, जादू टूट गया और गुलाब के भीतर से लूना बाहर निकल आई। कविन की दयालुता ने उस श्राप को खत्म कर दिया था। कविन ने लूना को सुरक्षित उसके माता-पिता के पास पहुँचा दिया।
Moral
ईर्ष्या बुराई लाती है, जबकि प्रेम हर बाधा को पार कर लेता है।