बहुत समय पहले की बात है, विक्रम नाम के एक बहुत ही बुद्धिमान राजा थे। उनके राज्य में चारों ओर शांति और खुशहाली थी। एक दिन, पड़ोसी राज्य का एक दूत एक बड़े लकड़ी के बक्से के साथ दरबार में आया।
दूत ने झुककर प्रणाम किया और कहा, "महाराज, हमारे राजा ने आपकी बुद्धिमत्ता की परीक्षा लेने के लिए एक अनोखा उपहार भेजा है।" जब बक्सा खोला गया, तो दरबारी दंग रह गए। एक सुंदर, चमकता हुआ सुनहरा शेर एक कांच के पिंजरे के अंदर बंद था। वह इतना असली लग रहा था कि मानो अभी बोल पड़ेगा।
दूत ने एक चुनौती दी, "महाराज, यदि आपके मंत्री वास्तव में बुद्धिमान हैं, तो उन्हें इस कांच के पिंजरे को बिना तोड़े या बिना खोले इस शेर को बाहर निकालना होगा।"
सभी मंत्रियों ने कोशिश की। उन्होंने पिंजरे को हिलाया, उसे तिरछा किया, लेकिन शेर बाहर नहीं निकला। दरबार में सन्नाटा छा गया। तभी राजा के चतुर मंत्री, आर्यन, खड़े हुए। उन्होंने कहा, "महाराज, क्या मैं उस शेर को करीब से देख सकता हूँ?"
आर्यन ने पिंजरे के चारों ओर घूमकर शेर को ध्यान से देखा। उन्होंने गौर किया कि शेर की चमक असली सोने जैसी नहीं थी। उन्होंने तुरंत कहा, "महाराज, कृपया लोहार को एक गर्म लोहे की छड़ लेकर आने के लिए कहें।"
दरबारी हैरान थे। "क्या यह शेर को पिघला देगा?" सब सोचने लगे। आर्यन ने सावधानी से गर्म छड़ को पिंजरे की एक छोटी सी दरार से अंदर डाला और शेर को छुआ। देखते ही देखते, शेर पिघलने लगा! वह सोना नहीं, बल्कि केवल मोम था।
आर्यन मुस्कुराए और बोले, "दूत जी, यह सोना नहीं, मोम का शेर है। हमने इसे पिंजरे के अंदर से ही बाहर निकाल लिया है।" दूत शर्म से पानी-पानी हो गया। दूसरों को नीचा दिखाने की उसकी कोशिश उसी पर भारी पड़ गई।
राजा विक्रम ने कहा, "इस मोम के शेर को ही अपने राजा के पास वापस ले जाओ। उन्हें बता देना कि बुद्धि छल को पहचान लेती है।"
Moral
जो दूसरों को नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं, उन्हें अंत में स्वयं अपमानित होना पड़ता है।