एक बड़े शहर में रवि नाम का एक युवा आविष्कारक रहता था। उसका एक बड़ा सपना था: दुनिया के हर अंधेरे कोने को रोशनी से भरना। इस सपने को पूरा करने के लिए वह एक विशेष प्रकार का बिजली का बल्ब बनाने की कोशिश कर रहा था।
उसकी प्रयोगशाला हमेशा अजीबोगरीब औजारों और सामानों से भरी रहती थी। एक दिन, उसने बल्ब बनाने के लिए एक नई चीज़ का इस्तेमाल किया, लेकिन वह तुरंत टूट गया। रवि निराश नहीं हुआ। अगले दिन उसने दूसरी चीज़ आजमाई, वह भी नाकाम रही।
ऐसा ही सिलसिला महीनों तक चलता रहा। उसने सैकड़ों बार कोशिश की। हर बार जब वह असफल होता, तो वह लिख लेता था कि वह चीज़ क्यों काम नहीं कर पाई। उसके कुछ दोस्तों ने कहा, "रवि, तुम इतनी बार असफल हो चुके हो, अब और क्यों कोशिश कर रहे हो? छोड़ दो इसे!" रवि बस मुस्कुराया और बोला, "मैं असफल नहीं हो रहा हूँ, मैं बस यह सीख रहा हूँ कि कौन सी चीज़ें काम नहीं करतीं।"
आखिरकार, एक दिन उसे सही सामग्री मिल गई। उसने बल्ब जलाया और वह बहुत ही सुंदर रोशनी से जगमगा उठा! यह खबर सुनकर पत्रकार उसके पास दौड़कर आए। उन्होंने पूछा, "रवि, इतनी बार असफल होने के बाद भी आप हिम्मत कैसे बनाए रख पाए?" रवि ने शांति से उत्तर दिया, "आप इसे असफलता कहते हैं, लेकिन मैं इसे अनुभव कहता हूँ। सफलता की जिस ऊंचाई पर मैं आज खड़ा हूँ, वह उन सीढ़ियों की तरह है जो मेरी पिछली हज़ार असफलताओं से बनी हैं। उन्हीं असफलताओं ने मुझे आज यहाँ तक पहुँचाया है।"
Moral
असफलताएँ सफलता की ओर ले जाने वाली सीढ़ियाँ हैं।