राजा विक्रम के दरबार में एक बड़ी बहस चल रही थी। एक मंत्री ने कहा कि भाग्य को कोई नहीं बदल सकता। लेकिन चतुर मंत्री सोमन ने मुस्कुराते हुए कहा, 'महाराज, बुद्धि और सूझबूझ से हम भाग्य को भी मात दे सकते हैं।'
राजा ने सोमन की बात को परखने के लिए एक योजना बनाई। उन्होंने आदेश दिया कि अगले दिन जब सोमन एक संकरी गली से गुजरें, तो एक गुस्सैल सांड को उनके सामने छोड़ दिया जाए। वह गली इतनी तंग थी कि सोमन के पास भागने की कोई जगह नहीं थी।
अगले दिन, राजा और अन्य मंत्री छिपकर देख रहे थे। जैसे ही सोमन उस संकरी गली में पहुँचे, सांड उनकी ओर तेजी से दौड़ने लगा। सोमन एक पल के लिए घबराए, लेकिन उन्होंने अपना धैर्य नहीं खोया। उन्होंने तुरंत अपने आसपास देखा और उन्हें दीवार के पास एक कांटेदार झाड़ी दिखाई दी।
सोमन ने फुर्ती से एक लंबी कांटेदार टहनी उठाई और सांड के रास्ते में फेंक दी। कांटे सांड के चेहरे और पैरों पर लगे, जिससे वह चौंक गया और रास्ता बदल लिया। इसी मौके का फायदा उठाकर सोमन एक मजबूत पत्थर के खंभे के पीछे छिप गए। सांड उनके पास से निकलकर चला गया।
राजा विक्रम यह देखकर बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने सोमन की प्रशंसा की और कहा, 'सोमन, तुमने साबित कर दिया कि बुद्धि से भाग्य को भी जीता जा सकता है!'
Moral
सूझबूझ और बुद्धिमानी से कठिन से कठिन परिस्थिति को भी बदला जा सकता है।