पहाड़ों के बीच एक सुंदर रिसॉर्ट में आर्यन और उसके पिता रवि ठहरे हुए थे। डाइनिंग हॉल में खाना खाते समय आर्यन बहुत उदास बैठा था। उसकी उदासी देखकर रिसॉर्ट के मैनेजर कपूर जी को लगा कि कुछ बात है।
कपूर जी ने धीरे से रवि जी से पूछा, "सर, क्या आपके बेटे को कोई परेशानी है? क्या हम कुछ मदद कर सकते हैं?"
रवि जी ने लंबी सांस ली और कहा, "धन्यवाद कपूर जी, पर कल आर्यन को इलाज के लिए अपना सिर मुंडवाना पड़ेगा। वह इस बात से बहुत डरा हुआ है और घबराया हुआ है। कृपया ध्यान रखिएगा कि कोई उसे देखकर दया न दिखाए, इससे उसे और बुरा लगेगा।"
अगली सुबह, जब आर्यन अपना सिर मुंडवाकर डाइनिंग हॉल में आया, तो वह बहुत शर्मिंदा महसूस कर रहा था। लेकिन जैसे ही उसने चारों ओर देखा, वह दंग रह गया! वहाँ मौजूद लगभग सभी मेहमानों ने अपने सिर मुंडवा रखे थे!
वे उसे दया की दृष्टि से नहीं, बल्कि मुस्कुराहट और प्रोत्साहन के साथ देख रहे थे। मैनेजर कपूर जी भी उन्हीं के साथ थे। आर्यन को महसूस हुआ कि वह अकेला नहीं है। उन अजनबियों के इस छोटे से कदम ने उसके दिल में उम्मीद जगा दी।
आर्यन ने भावुक होकर कहा, "आप लोग मुझे नहीं जानते, फिर भी आपने मेरा साथ देने के लिए यह किया। आपका बहुत-बहुत धन्यवाद!"
उस प्यार और समर्थन ने आर्यन को इतनी हिम्मत दी कि उसने अपनी बीमारी का बहादुरी से सामना किया। उन अजनबियों की दुआओं और साथ की वजह से, आर्यन न केवल बीमारी से लड़ा, बल्कि जीवन में बहुत सफल भी हुआ।
Moral
दूसरों के प्रति सहानुभूति और एकजुटता दिखाने से किसी को कठिन समय से लड़ने की शक्ति मिलती है।