एक विशाल और घने जंगल में एक बहुत बड़ा बरगद का पेड़ था। उस पेड़ के आसपास खरगोश, गिलहरी और कबूतर खुशी-खुशी रहते थे। लेकिन उस पेड़ की जड़ों में रहने वाला एक काला सांप सभी के लिए मुसीबत बन गया था। वह सांप जानवरों का खाना चुरा लेता था और पक्षियों के अंडों को भी नुकसान पहुँचाता था।
एक दिन, सभी जानवर एक जगह इकट्ठा हुए। खरगोश ने डरते हुए कहा, "यह सांप हमें चैन से रहने नहीं देगा।" गिलहरी और कबूतर ने भी अपनी परेशानियाँ बताईं। पास के पेड़ पर बैठी एक बुद्धिमान उल्लू यह सब सुन रही थी। वह नीचे आई और बोली, "अगर तुम अकेले लड़ोगे, तो वह तुम्हें हरा देगा। लेकिन अगर तुम सब मिलकर एक योजना बनाओ, तो उसे भगा सकते हो।"
उल्लू ने सुझाव दिया कि वे पास के पेड़ पर रहने वाले एक ताकतवर बंदर की मदद लें। सभी जानवर बंदर के पास पहुँचे और मदद मांगी। बंदर घबरा गया, उसने कहा, "सांप बहुत शक्तिशाली है, मैं अकेले उसका मुकाबला नहीं कर सकता।"
तभी उल्लू ने बंदर को समझाया, "तुम्हें अपनी ताकत से नहीं, बल्कि अपनी चतुराई से काम लेना होगा।" उल्लू की योजना के अनुसार, बंदर रोज़ाना सांप के बिल के पास एक छोटा शहद का छत्ता रखने लगा। एक हफ्ते तक ऐसा ही चलता रहा। शहद की खुशबू के लालच में सांप हमेशा बिल के बाहर ही इंतज़ार करने लगा।
आठवें दिन, उल्लू ने एक नई योजना बनाई। उसने बंदर से कहा, "आज शहद का छत्ता नहीं, बल्कि ततैया (wasps) का एक बड़ा सा घोंसला लाना।"
बंदर ने एक बड़ा ततैया का घोंसला सांप के बिल के पास रख दिया। जैसे ही भूखे सांप ने उस घोंसले पर हमला किया, सैकड़ों गुस्से में भरे ततैया बाहर निकल आए और सांप को काटने लगे! सांप दर्द से चिल्लाता हुआ जंगल के बहुत दूर भाग गया और फिर कभी वापस नहीं आया। जंगल में फिर से शांति छा गई और सभी जानवर खुशी-खुशी रहने लगे।