एक घने जंगल में कविन नाम का एक छोटा बंदर अपनी माँ के साथ रहता था। कविन की एक समस्या थी—वह बहुत भुलक्कड़ था। इस वजह से वह हमेशा उदास रहता था। उसकी माँ हमेशा कहती थी, 'कविन, हर किसी में कोई न कोई कमी होती है, लेकिन मेहनत से सब ठीक हो सकता है।'
एक दिन कविन स्कूल जाते समय अपना बस्ता लेना भूल गया। स्कूल में दूसरे जानवरों ने उसका मज़ाक उड़ाया, जिससे कविन बहुत शर्मिंदा हुआ। वह रोते हुए घर आया और बोला, 'अब मैं कभी स्कूल नहीं जाऊँगा!' धीरे-धीरे बड़ा होकर कविन ने जंगल के फल बेचने का काम शुरू किया।
एक दिन एक चालाक लोमड़ी कविन के पास आई। कविन फलों की कीमत भूल गया, यह देखकर लोमड़ी ने उसे ठगने की योजना बनाई। लोमड़ी ने कहा, 'कल तुमने दस फल एक सिक्के में दिए थे, आज भी वैसे ही दे दो।' कविन ने उसकी बात मान ली और कम पैसों में अपने सारे फल उसे दे दिए। लोमड़ी उसे लूटकर भाग गई।
जब कविन ने यह बात अपनी माँ को बताई, तो माँ ने उसे डाँट दिया। माँ की डाँट से कविन का दिल टूट गया। वह अपने दादाजी से मिलने शहर जाने के लिए निकल पड़ा। रास्ते में कविन रास्ता भटक गया और एक पत्थर के पास बैठकर रोने लगा। तभी शहर से आया एक समझदार बंदर वहाँ पहुँचा।
उस बंदर ने कविन को ढाँढस बँधाया और कहा, 'रो मत दोस्त, इस आधुनिक युग में इसके समाधान मौजूद हैं।' उसने कविन को एक स्मार्ट वॉच भेंट की। उसने समझाया, 'यह घड़ी उन चीज़ों को याद रखेगी जो तुम भूल जाते हो।'
कविन ने घड़ी में अपना घर का पता और फलों के दाम दर्ज कर लिए। अब वह सुरक्षित महसूस कर रहा था। घर लौटते समय उसे वही लोमड़ी मिली। कविन ने घड़ी की मदद से लोमड़ी की पिछली चालाकी के बारे में जाना। कविन ने लोमड़ी से कहा, 'एक बड़े व्यापारी ने आपके भाई को ढूँढा था, उन्होंने कहा है कि वे कल सारे फल एक साथ खरीद लेंगे।' लोमड़ी लालच में आ गई और उसने कविन को कुछ और पैसे दिए ताकि वह ज़्यादा फल इकट्ठा कर सके।
कविन ने घड़ी में सब कुछ रिकॉर्ड किया और तुरंत घर पहुँच गया। उसकी माँ उसकी चतुराई देखकर बहुत खुश हुईं। कविन ने सीख लिया कि अपनी कमी को तकनीक की मदद से कैसे दूर किया जाता है।
Moral
सही तकनीक और बुद्धिमानी से हम अपनी कमियों पर जीत पा सकते हैं।