एक शांत गाँव में सैमुअल नाम के एक बुजुर्ग रहते थे। उन्हें हमेशा किसी न किसी चीज़ की शिकायत रहती थी। "चाय बहुत गर्म है!”, "रास्ता बहुत ऊबड़-खाबड़ है!”, "आज धूप बहुत तेज़ है!” वे हमेशा ऐसे ही बुदबुदाते रहते थे। वे जीवन की अच्छाइयों को देखना भूल गए थे और केवल कमियों पर ध्यान देते थे।
एक दोपहर, सैमुअल गाँव के चौक में एक बेंच पर बैठे लंबी आहें भर रहे थे। लियो नाम का एक छोटा लड़का, जो रंगीन पत्थर इकट्ठा कर रहा था, उनके पास आया। लियो ने पूछा, "सैमुअल, आपका चेहरा इतना उदास क्यों है?”
सैमुअल ने लंबी सांस ली और कहा, "बेटा, जीवन बहुत कठिन है। सब कुछ कितना परेशानी भरा है!”
लियो ने मुस्कुराते हुए कहा, "क्या आपके जीवन में कभी कोई खुशी का पल नहीं आया?”
सैमुअल ने उदासी से कहा, "ज़्यादा नहीं।”
लियो ने एक सुझाव दिया, "तो चलिए एक खेल खेलते हैं। अपनी आँखें बंद कीजिए। उन तीन चीज़ों के बारे में सोचिए जो आपके जीवन में सबसे अच्छी रही हैं। वे छोटी हो सकती हैं, लेकिन वे आपको खुशी देने वाली होनी चाहिए।”
सैमुअल ने अपनी आँखें बंद कर लीं। पहले तो उनके मन में परेशानियाँ ही आईं, लेकिन फिर उन्हें याद आया कि कैसे सालों पहले उन्होंने अपने दोस्तों के साथ बारिश में मस्ती की थी, कैसे उनके घर में स्वादिष्ट खाने की खुशबू आती थी, और कैसे सुबह की ताज़ी हवा उन्हें सुकून देती थी। इन यादों ने उनके चेहरे पर एक हल्की मुस्कान ला दी।
जब सैमुअल ने आँखें खोलीं, तो उनका चेहरा चमक रहा था। उन्होंने लियो को गले लगाया और कहा, "बेटा, तुमने मुझे बहुत बड़ी बात सिखा दी। मैं अपनी मुश्किलों को गिनने में इतना व्यस्त था कि मैं अपनी खुशियों को गिनना ही भूल गया। अब मेरा मन बहुत हल्का महसूस कर रहा है।”
उस दिन के बाद से, सैमुअल ने शिकायत करना छोड़ दिया और जीवन के छोटे-छोटे सुखों का आनंद लेने लगे।
Moral
खुशी इस बात में नहीं है कि जीवन कितना पूर्ण है, बल्कि इस बात में है कि हम कितनी अच्छी चीज़ों को देख पाते हैं।