एक छोटे से गाँव में आर्यन और उसका मित्र कबीर रहते थे। आर्यन के पिता एक व्यापारी थे। एक दिन उन्होंने दोनों को बुलाया और कहा, "जीवन में सफल होने के लिए लोगों को समझना ज़रूरी है। यह कुछ पैसे लो और बाज़ार जाकर छोटा सा व्यापार शुरू करो।"
आर्यन और कबीर बहुत उत्साहित थे। जब वे बाज़ार जा रहे थे, तो उन्होंने एक पेड़ के नीचे एक बूढ़े दंपत्ति को बहुत थका हुआ और भूखा देखा। आर्यन का दिल पिघल गया। उसने व्यापार के लिए रखे पैसों से उनके लिए भोजन और पानी खरीदा।
बूढ़ी महिला ने भावुक होकर कहा, "बेटा, हमें धन नहीं चाहिए, पर तुमने इस समय हमें भोजन देकर बहुत बड़ा काम किया है।"
जब आर्यन घर लौटा, तो उसके पिता ने पूछा, "व्यापार कैसा रहा? क्या मुनाफा हुआ?"
आर्यन ने विनम्रता से कहा, "पिताजी, आज मुझे व्यापार में बहुत लाभ तो नहीं हुआ, लेकिन मुझे किसी की मदद करने का सौभाग्य मिला।"
उसके पिता ने मुस्कुराते हुए कहा, "बहुत अच्छे बेटा! जब कोई किसी की मदद करना चाहता है, तो ईश्वर स्वयं उसे एक माध्यम के रूप में भेजता है। आज तुमने ईश्वर का ही कार्य किया है। दूसरों की सेवा करना ही सबसे बड़ा धन है।"
Moral
दूसरों की मदद करने का अवसर मिलने पर उसे खुशी-खुशी स्वीकार करना चाहिए।