एक हलचल भरे शहर में रवि नाम का एक कुशल मैकेनिक रहता था। वह किसी भी मशीन को ठीक करने में माहिर था। एक दिन, शहर के प्रसिद्ध डॉक्टर अरुण अपनी कार की खराबी के कारण रवि की वर्कशॉप में आए।
कार की जाँच करने के बाद, रवि बड़े गर्व से बोला, "डॉक्टर साहब, मुझे लगता है कि हम दोनों का काम लगभग एक जैसा ही है। मैं पहले मशीन की खराबी ढूँढता हूँ, फिर खराब पुर्जे बदल देता हूँ या उन्हें साफ कर देता हूँ, और अंत में मशीन को फिर से चालू कर देता हूँ। हम दोनों ही समस्याओं को हल करते हैं!"
डॉक्टर अरुण धीरे से मुस्कुराए और रवि की आँखों में देखते हुए पूछा, "रवि, जब तुम मशीन ठीक करते हो, तो वह शांत रहती है। लेकिन क्या तुम एक जीवित इंसान के धड़कते दिल और चलती सांसों के बीच उसकी जान बचाने के लिए सर्जरी कर सकते हो?"
रवि सन्न रह गया। उसके शब्द उसके अपने ही अहंकार पर प्रहार कर गए। उसे समझ आया कि एक मशीन को खोलकर जोड़ा जा सकता है, लेकिन एक इंसान की ज़िंदगी को बचाना कितना कठिन और जिम्मेदारी भरा काम है। उस दिन रवि ने सीखा कि हर पेशे का अपना एक अलग सम्मान और गहराई होती है। उसने अपना घमंड त्याग दिया और दूसरों के काम का सम्मान करना सीख लिया।
Moral
हर पेशे का अपना महत्व और गरिमा होती है, कभी भी किसी के काम को छोटा नहीं समझना चाहिए।