एक सुंदर हरे-भरे मैदान के बीचों-बीच एक साफ नीला तालाब था। वहाँ एक हंस अपने तीन छोटे बच्चों के साथ खुशी-खुशी रहता था। हंस के बच्चे बहुत ही चंचल और प्यारे थे।
एक सुबह, हंस अपने बच्चों को लेकर घास के मैदान में टहल रहा था। तभी उसने देखा कि झाड़ियों के पीछे एक लोमड़ी छिपी हुई है। लोमड़ी की आँखें भूख से चमक रही थीं और वह नन्हे बच्चों पर हमला करने की ताक में थी।
हंस घबराया नहीं, बल्कि उसने समझदारी से काम लिया। उसने अपने बच्चों से धीरे से कहा, "बच्चों, बिना शोर मचाए जल्दी से तालाब के गहरे पानी में चले जाओ।" बच्चे तुरंत समझ गए और तैरते हुए तालाब के बीच में पहुँच गए।
लोमड़ी को लगा कि अगर वह बड़े हंस को पकड़ लेगी, तो उसे अच्छा भोजन मिल जाएगा। लोमड़ी ने हंस को फँसाने के लिए उसकी ओर दौड़ लगाई। जैसे ही लोमड़ी बिल्कुल पास आई, हंस ने फुर्ती दिखाई और पानी में छलांग लगा दी। लोमड़ी किनारे पर फिसल गई और खाली हाथ रह गई। हंस और उसके बच्चे सुरक्षित थे।
Moral
साहस और बुद्धिमानी से हम अपनों की रक्षा कर सकते हैं।