एक छोटे से गाँव में कवि नाम का एक किसान रहता था। उसके पास ब्रूनो नाम का एक बहुत ही वफादार कुत्ता था। कवि की एक छोटी सी बेटी थी, जिससे वह बहुत प्यार करता था। एक दोपहर, जब कवि अपने खेतों में काम कर रहा था, घर में सब शांत था।
तभी एक भूखी लोमड़ी खिड़की से घर के अंदर घुस आई। जैसे ही लोमड़ी ने बच्चे के पालने की ओर रुख किया, सो रहे ब्रूनो की नींद खुल गई। ब्रूनो तुरंत लोमड़ी पर झपट पड़ा। लोमड़ी और ब्रूनो के बीच काफी देर तक संघर्ष चला। अंत में लोमड़ी वहां से भाग गई, लेकिन ब्रूनो के मुँह और फर्श पर खून लगा हुआ था।
जब कवि घर लौटा, तो उसने ब्रूनो के चेहरे पर खून देखा। घबराहट और गुस्से में कवि ने सोचा, 'क्या इस जानवर ने मेरी बच्ची को नुकसान पहुँचाया है?' बिना कुछ सोचे-समझे, उसने गुस्से में एक डंडा उठाया और ब्रूनो को मार दिया।
घबराया हुआ कवि तुरंत कमरे के अंदर भागा। वहाँ उसने देखा कि उसकी बेटी पालने में शांति से सो रही थी। फर्श पर लोमड़ी के पैरों के निशान थे। कवि को समझ आया कि ब्रूनो ने बच्ची को नुकसान नहीं पहुँचाया था, बल्कि उसे बचाया था। अपनी गलती का एहसास होने पर कवि फूट-फूट कर रोने लगा।
Moral
बिना सोचे-समझे और गुस्से में लिया गया निर्णय हमेशा दुख देता है।