अरुल नाम का एक बहुत ही दयालु व्यापारी था। वह हमेशा दूसरों की मदद करने के लिए तैयार रहता था। लेकिन एक दिन समुद्र में आए भयानक तूफान ने उसके सारे व्यापारिक जहाज डुबो दिए। देखते ही देखते वह कंगाल हो गया और उसके दोस्तों ने भी उसका साथ छोड़ दिया।
एक रात अरुल ने एक अजीब सपना देखा। सपने में एक साधु आए और उन्होंने अरुल को एक लकड़ी की छड़ी दी और कहा, 'इसे मेरे सिर पर धीरे से छुओ।' जैसे ही अरुल ने ऐसा किया, वह साधु सोने के ढेर में बदल गए! सुबह उठकर अरुल को लगा कि यह केवल एक सपना था।
अगले दिन एक मजदूर अरुल के घर आया। उसके हाथ में एक लकड़ी की छड़ी थी। अरुल को अपना सपना याद आया और उसने मज़ाक-मज़ाक में वैसा ही किया। चमत्कार हो गया! वह मजदूर सोने की ढेरी बन गया! अरुल बहुत खुश हुआ और उसने उस मजदूर को धन्यवाद के रूप में कुछ सोना दिया।
लेकिन उस मजदूर के मन में लालच आ गया। उसने सोचा, 'अगर एक आदमी सोना बन सकता है, तो सब क्यों नहीं?' वह गाँव में दौड़ने लगा और लोगों के सिर पर छड़ी से मारने लगा ताकि वे भी सोना बन जाएँ। लोग डर गए और गुस्सा हो गए। उन्होंने उस मजदूर को पकड़कर राजा के पास पहुँचा दिया। राजा ने अरुल की सच्चाई की सराहना की, लेकिन लालच के कारण लोगों को परेशान करने वाले उस मजदूर को जेल में डाल दिया।
Moral
लालच बुरी बला है; जो प्राप्त है उसमें संतोष करना चाहिए।