एक छोटे से शहर में चार दोस्त रहते थे। वे सारा दिन खेलने और घूमने-फिरने में बिताते थे। पढ़ाई के मामले में वे बहुत ही लापरवाह थे और कभी किताबों को हाथ नहीं लगाते थे।
एक दिन स्कूल में वार्षिक परीक्षा की घोषणा हुई। चारों दोस्त घबरा गए क्योंकि उन्होंने कुछ भी नहीं पढ़ा था। उन्होंने परीक्षा से बचने के लिए एक योजना बनाई।
परीक्षा से एक दिन पहले, वे प्रिंसिपल के पास गए और बहुत दुखी होने का नाटक करने लगे। एक दोस्त बोला, "सर, कल जब हम अपने रिश्तेदारों के घर जा रहे थे, तो हमारी कार का टायर पंक्चर हो गया था। हम रास्ते में फंस गए थे, इसलिए हम पढ़ नहीं पाए।"
प्रिंसिपल ने उनकी बात सुनी और कहा, "अच्छा, यह तो बहुत बुरा हुआ। ठीक है, तुम्हारी परेशानी को देखते हुए मैं परीक्षा अगले हफ्ते कर दूँगा। लेकिन एक शर्त है, अगले हफ्ते परीक्षा के समय तुम चारों को अलग-अलग कमरों में बैठकर परीक्षा देनी होगी।"
चारों दोस्त मन ही मन खुश हुए। उन्होंने सोचा, "अलग-अलग कमरों में बैठने से क्या होगा? हम एक-दूसरे को इशारे करके मदद कर लेंगे।"
परीक्षा का दिन आया। वे बड़े आत्मविश्वास के साथ परीक्षा हॉल में बैठे। लेकिन जैसे ही उन्होंने प्रश्न पत्र खोला, उनके होश उड़ गए! प्रश्न पत्र में कोई गणित या विज्ञान का सवाल नहीं था। उसमें केवल एक ही सवाल लिखा था:
"कल कार यात्रा के दौरान, कौन सा टायर पंक्चर हुआ था?
- आगे का बायाँ
- आगे का दायाँ
- पीछे का बायाँ
- पीछे का दायाँ"
चारों दोस्त एक-दूसरे का मुँह देखने लगे। उनकी चालाकी उन्हीं पर भारी पड़ गई थी। उन्हें समझ आ गया कि झूठ बोलकर वे अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकते, बल्कि उन्होंने खुद को मुसीबत में डाल लिया है।
Moral
झूठ बोलकर आप मुश्किल से बच तो सकते हैं, लेकिन वह झूठ अंत में आपको बड़ी मुसीबत में डाल देता है।