सुनहरे घास के मैदानों में घूमते हुए एक बहादुर शिकारी और एक शानदार शेर आपस में बातें कर रहे थे। वे पुराने दोस्त थे, लेकिन अचानक उनके बीच एक बहस छिड़ गई।
"इस दुनिया में सबसे शक्तिशाली कौन है?" शेर ने दहाड़ते हुए पूछा। "निश्चित रूप से मैं! मेरी एक दहाड़ से पूरा जंगल कांप उठता है। जंगली जानवरों का राजा होने के नाते मुझसे बढ़कर कोई नहीं है।"
शिकारी मुस्कुराया और बोला, "ताकत ही सब कुछ नहीं होती, शेर भाई। बुद्धि और कौशल के साथ, मैं किसी भी चुनौती का सामना कर सकता हूँ। इंसान ही इस दुनिया का स्वामी है क्योंकि उसके पास दिमाग है।"
बहस करते हुए वे एक पुराने खंडहर के पास से गुजरे, जहाँ एक पत्थर पर बहुत सुंदर नक्काशी की गई थी। उस नक्काशी में एक इंसान को एक विशाल जानवर के ऊपर शान से खड़ा दिखाया गया था।
शिकारी खुशी से चिल्लाया, "देखो! यह मूर्ति मेरे दावे का सबूत है। इसमें इंसान एक जानवर के ऊपर खड़ा है, जिसका मतलब है कि इंसान ही सबसे ऊँचा है!"
शेर ने शांति से उस मूर्ति को देखा और कहा, "तुम सही कह रहे हो दोस्त, यह कलाकृति सुंदर है। लेकिन याद रखो, इसे एक इंसान ने बनाया है। अगर इसे किसी शेर ने बनाया होता, तो यह मूर्ति शेर की वीरता और उसके गौरव को दर्शाती।"
शिकारी शेर की इस गहरी बात को सुनकर दंग रह गया। उसे समझ आया कि मूर्ति इंसान की श्रेष्ठता नहीं, बल्कि कलाकार के नजरिए को दिखा रही थी। दोनों दोस्त बिना किसी बहस के, एक-दूसरे का सम्मान करते हुए आगे बढ़ गए।
Moral
हर किसी का देखने का नजरिया अलग होता है; दूसरों के दृष्टिकोण को समझना ही सच्ची बुद्धिमानी है।