कविन नाम का एक लड़का था। उसे महसूस हो रहा था कि जीवन में सब कुछ गलत हो रहा है। पढ़ाई हो या खेल, कुछ भी उसके मन मुताबिक नहीं हो रहा था। एक शाम, वह बहुत दुखी होकर अपने पिता के पास गया और बोला, "पिताजी, जीवन बहुत कठिन है। मुझे लगता है कि मैं इन मुश्किलों का सामना नहीं कर पाऊंगा।"
उसके पिता ने उसे सांत्वना देने के बजाय रसोई में ले जाने का फैसला किया। वहां चूल्हे पर तीन बर्तन रखे थे और तीनों में पानी उबल रहा था।
पिता ने पहले बर्तन में एक नरम सब्जी डाली, दूसरे में एक सख्त आलू डाला और तीसरे में चाय की कुछ पत्तियां डाल दीं।
कुछ देर बाद, पिता ने बर्तन से चीजें बाहर निकालीं। उन्होंने कहा, "कविन, देखो, यह सब्जी जो पहले ताजी और सख्त थी, उबलते पानी में आकर बहुत नरम और कमजोर हो गई। यह आलू जो पहले बहुत कठोर था, अब नरम होकर टूट सकता है। लेकिन इन चाय की पत्तियों को देखो! इन्होंने गर्म पानी की चुनौती को स्वीकार किया और उस साधारण पानी को एक खुशबूदार और स्वादिष्ट चाय में बदल दिया।"
पिता ने प्यार से समझाया, "जीवन की मुश्किलें भी इस उबलते पानी की तरह हैं। तुम सब्जी की तरह कमजोर बन सकते हो, आलू की तरह अपनी शक्ति खो सकते हो, या चाय की पत्तियों की तरह मुश्किलों का उपयोग करके खुद को और अपने आसपास के माहौल को बेहतर बना सकते हो।"
कविन को बात समझ आ गई और उसने मुस्कुराते हुए चुनौतियों का सामना करने का संकल्प लिया।
Moral
मुश्किलों से घबराकर टूटें नहीं, बल्कि उन्हें खुद को बेहतर बनाने का जरिया बनाएं।