एक छोटे से गाँव में एक पुराना और बड़ा बंगला था। गाँव के लोग कहते थे कि उस घर में भूत है, क्योंकि रात में वहाँ से अजीब संगीत और खाने की खुशबू आती थी। डर के कारण कोई भी उस घर के पास नहीं जाता था।
विक्रम नाम का एक समझदार युवक उस गाँव में आया। उसे वह बंगला बहुत पसंद आया। गाँव वालों ने उसे बहुत रोका, लेकिन विक्रम ने उस घर को खरीद लिया और वहाँ रहने चला गया।
पहली रात, जब विक्रम बैठा था, तभी उसे एक मधुर संगीत सुनाई दिया और अचानक रसोई से स्वादिष्ट भोजन की महक आने लगी। विक्रम तो शांत रहा, लेकिन उसके परिवार वाले डर गए और रात बिताने के लिए पड़ोसियों के घर चले गए।
विक्रम डरा नहीं, बल्कि उसने पता लगाने की ठानी कि यह सब कहाँ से हो रहा है। उसने टॉर्च ली और घर के कोने-कोने की जाँच की। उसे पता चला कि खिड़की का एक ढीला हिस्सा हवा से टकराकर संगीत जैसी आवाज़ कर रहा था। खाने की खुशबू एक पुराने पाइप से आ रही थी जो नमी के कारण अजीब गंध छोड़ रहा था।
विक्रम ने खिड़की और पाइप दोनों को ठीक कर दिया। अगले दिन जब गाँव वाले देखने आए, तो विक्रम ने उन्हें समझाया, "डर केवल हमारे मन का भ्रम है। जब हम सच का पता लगाते हैं, तो डर गायब हो जाता है।" गाँव वालों को अपनी गलती का एहसास हुआ और अब वह घर खुशियों से भर गया।
Moral
बिना सोचे-समझे किसी बात से डरना नहीं चाहिए; सच्चाई जानने की कोशिश करें।