एक घने जंगल के किनारे एक लोमड़ी रहती थी। वह बहुत ही भोली थी और जो कुछ भी सुनती, बिना सोचे-समझे उस पर विश्वास कर लेती थी। एक दिन, भूख से बेहाल होकर, वह भोजन की तलाश में पास के एक गाँव की ओर निकल पड़ी।
गाँव के एक छोटे से घर की खिड़की से उसने देखा कि एक माँ अपने बच्चे को खाना खिला रही है। लोमड़ी के मन में लालच आ गया। उसने सोचा, 'वह छोटा बच्चा मेरे भोजन के लिए कितना अच्छा रहेगा!'
तभी बच्चा खाना खाने के लिए ज़िद करने लगा। बच्चे को बहलाने के लिए माँ ने मज़ाक में कहा, "अगर तुम खाना नहीं खाओगे, तो जंगल का वह बड़ा लोमड़ी आकर तुम्हें ले जाएगा!"
खिड़की के पीछे छिपी लोमड़ी ने यह सुना और वह खुशी से झूम उठी। उसने सोचा कि माँ सच कह रही है और वह बच्चा उसे मिल जाएगा। वह पूरी रात वहीं खिड़की के पास दुबक कर इंतज़ार करती रही।
अगले दिन सुबह जब माँ और बच्चा बाहर आए, तो बच्चे ने पूछा, "माँ, क्या लोमड़ी सच में आएगी? अगर वह आई तो आप क्या करेंगी?"
माँ ने मुस्कुराते हुए कहा, "डरो मत बेटा, देखो तुम्हारे पिता आ रहे हैं। उनके पास वह बड़ा भाला है। अगर कोई जंगली जानवर आया, तो वे उसे भगा देंगे।"
तभी लोमड़ी ने देखा कि पिता हाथ में एक बड़ा और नुकीला भाला लेकर आ रहे हैं। भाला देखते ही लोमड़ी के होश उड़ गए। उसे समझ आया कि माँ की बात तो झूठ थी, लेकिन वह भाला बिल्कुल सच था!
डर के मारे लोमड़ी अपनी जान बचाकर जंगल की ओर भाग गई। अपनी मूर्खता पर पछताते हुए उसने सोचा कि काश उसने सुनी-सुनाई बातों पर इतनी जल्दी भरोसा न किया होता।
Moral
सुनी-सुनाई बातों पर आँख बंद करके भरोसा नहीं करना चाहिए; हमेशा सच्चाई की जाँच करनी चाहिए।