एक शांत शाम को, प्रसिद्ध लेखक श्री रवि एक पार्क में टहल रहे थे। वे अपनी अगली किताब के बारे में सोच रहे थे। तभी एक बुजुर्ग व्यक्ति उनके पास आए और विनम्रता से पूछा, "श्रीमान, आज मेरे पास भोजन के लिए भी पैसे नहीं हैं। क्या आप मेरी कुछ मदद कर सकते हैं?"
रवि ने तुरंत अपनी जेब में हाथ डाला। वे एक दयालु व्यक्ति थे और हमेशा मदद के लिए कुछ पैसे रखते थे। लेकिन, जैसे ही उन्होंने अपनी जेब टटोली, उन्हें याद आया कि वे आज सुबह जल्दबाजी में अपना बटुआ मेज पर ही भूल आए हैं। बहुत शर्मिंदा होते हुए उन्होंने बुजुर्ग से कहा, "मुझे क्षमा करें, आज मेरे पास देने के लिए पैसे नहीं हैं। मुझे बहुत दुख है।"
उस बुजुर्ग व्यक्ति ने रवि की आँखों में देखा और उनके चेहरे पर पछतावा महसूस किया। वे गुस्सा होने के बजाय मुस्कुराए और बोले, "कोई बात नहीं श्रीमान, दुखी न हों। आपने मुझे अनदेखा नहीं किया और सम्मान के साथ बात की, यही मेरे लिए बहुत है। धन से कहीं अधिक कीमती आपका यह व्यवहार और सम्मान है।"
रवि उनकी बात सुनकर भावुक हो गए। उन्होंने महसूस किया कि भले ही वे आर्थिक मदद नहीं कर सके, लेकिन एक इंसान को दिया गया सम्मान दुनिया की सबसे बड़ी दौलत है।
Moral
धन से कहीं अधिक मूल्यवान सम्मान और दयालुता है।