एक शांत गाँव के पास एक घना जंगल था, जहाँ सैमुअल नाम का एक बढ़ई रहता था। वह लकड़ी की बहुत सुंदर चीज़ें बनाता था। एक शाम, काम खत्म करने के बाद, उसने अपना तेज़ औज़ार और लकड़ी का एक टुकड़ा अपने बरामदे में ही छोड़ दिया और सोने चला गया।
रात के समय, एक जंगली साँप रेंगते हुए बरामदे तक आ पहुँचा। वह साँप बहुत ही गुस्सैल स्वभाव का था। बरामदे में घूमते समय, उसकी नज़र लकड़ी के टुकड़े के पास चमकती हुई एक चीज़ पर पड़ी। कम रोशनी में, वह तेज़ औज़ार किसी छोटे जानवर के कान जैसा लग रहा था।
बिना सोचे-समझे, गुस्से में आकर साँप ने उस पर हमला कर दिया। लेकिन उसे मांस नहीं, बल्कि लोहे का तेज़ औज़ार मिला! उस औज़ार की धार से साँप को गहरा ज़ख्म हो गया। साँप दर्द से तड़पने लगा, लेकिन उसे अपनी गलती समझने का मौका नहीं मिला और वह वहीं मर गया। यह घटना सिखाती है कि बिना सोचे-समझे और गुस्से में लिया गया निर्णय खुद के लिए ही घातक होता है।
Moral
बिना सोचे-समझे और क्रोध में किया गया कार्य विनाशकारी होता है।