एक छोटे से गाँव में रवि नाम का एक युवक रहता था। उसके पिता अनाज का एक बड़ा व्यापार करते थे। रवि स्वभाव से बहुत सीधा था, लेकिन उसे व्यापार की समझ और अनुभव नहीं था। पिता के निधन के बाद, दुकान की सारी जिम्मेदारी रवि पर आ गई।
एक दिन बाज़ार में व्यापारियों की बातचीत सुनते हुए रवि ने सुना, "आने वाले मानसून के कारण अनाज की कीमतें बहुत बढ़ जाएंगी!" यह सुनकर रवि के मन में लालच आ गया। उसने सोचा कि अगर वह अनाज को अभी कहीं छिपा दे, तो बाद में उसे ऊँचे दामों पर बेचकर बहुत मुनाफा कमा सकता है। उसे डर भी था कि दुकान में अनाज रखने से कोई उसे चुरा न ले।
रवि ने एक मूर्खतापूर्ण योजना बनाई। वह दुकान से अनाज की सभी बोरियाँ उठाकर अपने घर के पीछे वाले खेत में ले गया। वहाँ उसने एक गहरा गड्ढा खोदा और एक-एक करके सारी बोरियाँ खाली कर दीं। उसने सारा अनाज उस गड्ढे में डाल दिया। उसने सोचा, "अब यह अनाज यहाँ सुरक्षित है, जब दाम बढ़ेंगे तब निकाल लेंगे।"
लेकिन रवि की यह योजना बहुत बड़ी भूल साबित हुई। मिट्टी के संपर्क में आते ही अनाज खराब होने लगा। कुछ ही दिनों में बारिश हुई और गड्ढे में भरा सारा अनाज कीचड़ बनकर सड़ गया। रवि के पास अब बेचने के लिए कुछ नहीं बचा था। उसने अपनी जल्दबाजी और बिना सोचे-समझे किए गए काम से सब कुछ खो दिया। उसे समझ आ गया कि बिना बुद्धि के किया गया काम केवल नुकसान ही पहुँचाता है।
Moral
बिना सोचे-समझे और जल्दबाजी में लिए गए फैसले भारी नुकसान पहुँचाते हैं।