एक शांत गाँव में आदित नाम का एक लड़का रहता था। उसे नई चीज़ें सीखना बहुत पसंद था। एक दिन, उसके दादाजी रंगीन वर्णमाला के अक्षरों से भरा एक पुराना लकड़ी का बक्सा लेकर आए। आदित ने उत्साह से उन अक्षरों को ज़मीन पर फैला दिया।
'दादाजी, ये अक्षर मिलकर कितनी सारी कहानियाँ बनाते हैं,' आदित ने कहा, 'लेकिन यह सब शुरू कहाँ से हुआ?'
दादाजी मुस्कुराए और पूछा, 'आदित, अगर तुम कोई बड़ी कहानी की किताब पढ़ना चाहो, तो सबसे पहले क्या देखोगे?'
'सबसे पहला अक्षर!' आदित ने तुरंत उत्तर दिया।
'बिल्कुल सही,' दादाजी ने प्यार से समझाया। 'जैसे हर शब्द और हर किताब की शुरुआत उस पहले अक्षर से होती है, वैसे ही इस पूरी दुनिया की भी एक शुरुआत है। जैसे बिना 'अ' के वर्णमाला अधूरी है, वैसे ही यह पहाड़, नदियाँ और तारे सब उस एक परम शक्ति की वजह से हैं जिसने इस सृष्टि की रचना की। वही शक्ति इस संसार का आधार और आरंभ है।'
आदित ने खिड़की से बाहर खुले आसमान और पेड़ों को देखा। उसे समझ आया कि जैसे हर सुंदर वाक्य के लिए एक शुरुआती अक्षर ज़रूरी है, वैसे ही इस विशाल संसार के पीछे एक महान शुरुआत है।