एक शांत गाँव में कविन नाम का एक लड़का रहता था। उसे कढ़ाई का काम बहुत पसंद था। उसके दादाजी एक बहुत अच्छे कारीगर थे, लेकिन उम्र बढ़ने के कारण उनके हाथों में कंपन होने लगा था, जिससे बारीक काम करना मुश्किल हो गया था। गाँव के उत्सव के लिए बहुत ही सुंदर और जटिल डिज़ाइन वाले रेशमी कपड़ों की ज़रूरत थी।
कविन के दोस्त रवि ने उसे देखा और हँसते हुए कहा, 'कविन, तुम यह क्यों कर रहे हो? यह बहुत कठिन है, तुम हार जाओगे। चलो खेलने चलते हैं!' रवि हमेशा आसान काम ही करना चाहता था।
लेकिन कविन ने हार नहीं मानी। उसने अपने दादाजी की मदद करने का फैसला किया। कई दिनों तक वह धूप में बैठकर, आँखों की थकान और उंगलियों के दर्द के बावजूद, बहुत ही बारीक धागों से उन कठिन डिज़ाइनों को उकेरता रहा। कई बार धागा टूटा, कई बार मन थका, पर वह रुका नहीं।
जब उत्सव का दिन आया, तो वे रेशमी कपड़े इतने सुंदर लग रहे थे कि पूरा गाँव उन्हें देखता रह गया। रवि चुपचाप खड़ा रह गया। कविन ने वह कर दिखाया जो दूसरों के लिए असंभव था। उस दिन कविन ने साबित कर दिया कि महानता आसान कामों में नहीं, बल्कि कठिन चुनौतियों को पार करने में है।