एक शांत गाँव में रामू नाम का एक किसान अपनी पत्नी सीता और बेटे आर्यन के साथ रहता था। रामू बहुत ही नेक दिल इंसान था। एक दिन उसके सामने एक बड़ी चुनौती आ गई। जब वह खेत में काम कर रहा था, तभी एक थका हुआ यात्री उसके दरवाजे पर आया। उसी समय, सीता ने देखा कि रामू के वृद्ध पिता की तबीयत ठीक नहीं है। ऊपर से, उस दिन गाँव का त्योहार था, जिसका अर्थ था कि रामू को भगवान की पूजा भी करनी थी और अपने परिवार का ध्यान भी रखना था।
रामू सोच में पड़ गया, 'मैं सबसे पहले क्या करूँ?' लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी। उसने सबसे पहले अपने पिता की सेवा की। फिर, उसने यात्री का स्वागत किया और उसे भोजन कराया। इसके बाद, उसने सीता के साथ मिलकर भगवान के लिए प्रसाद तैयार किया। उसने अपने रिश्तेदारों को भी याद किया और उनकी मदद के लिए समय निकाला। रामू को समझ आया कि अपने पूर्वजों का सम्मान करना, ईश्वर की भक्ति करना, मेहमानों का सत्कार करना, रिश्तेदारों का ख्याल रखना और अपने स्वयं के स्वास्थ्य और मन का ध्यान रखना ही जीवन का असली आधार है।
उस रात, जब पूरा परिवार साथ बैठा, तो रामू के चेहरे पर एक अनोखी शांति थी। उसने जान लिया था कि इन पाँच कर्तव्यों को निभाकर ही एक घर स्वर्ग बन सकता है।