एक सुंदर से गाँव में सैमुअल नाम का एक बहुत अमीर आदमी रहता था। उसके पास बहुत सारी ज़मीन, सोना और कीमती चीज़ें थीं। लेकिन सैमुअल हमेशा एक अजीब सी उदासी में रहता था। उसका बेटा लियो हमेशा खेल-कूद और ऐशो-आराम में ही डूबा रहता था। उसे परिवार की ज़िम्मेदारियों या जीवन के मूल्यों की कोई परवाह नहीं थी।
एक बार गाँव में भीषण बाढ़ आ गई। सैमुअल का बड़ा सा घर और उसकी सारी जमा पूँजी पानी में बह गई। सैमुअल बहुत दुखी होकर बैठा था। तभी लियो दौड़कर आया और उसने अपने पिता का हाथ थाम लिया। लियो ने बड़े साहस से कहा, 'पिताजी, आप हिम्मत मत हारिए। हमारा धन और घर चला गया है, लेकिन हम सुरक्षित हैं। मैं आपके साथ मिलकर फिर से मेहनत करूँगा और हम सब कुछ दोबारा खड़ा कर लेंगे।'
लियो की इस समझदारी और परिपक्वता को देखकर सैमुअल की आँखों में आँसू आ गए। उसे एहसास हुआ कि भले ही उसका सोना चला गया हो, लेकिन उसके पास एक बुद्धिमान और संस्कारी बेटा है। उसने महसूस किया कि दुनिया में सबसे बड़ा धन सोना-चांदी नहीं, बल्कि एक समझदार संतान है।