एक छोटे से गाँव में अर्जुन अपने दादाजी के साथ रहता था। उसके दादाजी मोची का काम करते थे। एक शाम अचानक बहुत तेज़ बारिश होने लगी। दादाजी बहुत परेशान थे क्योंकि उन्होंने एक यात्री के लिए बहुत सुंदर जूते तैयार किए थे, और छत से पानी टपकने के कारण उन जूतों के खराब होने का डर था।
अर्जुन की सहेली मीरा ने यह देखा। वह तुरंत अपने घर से एक बड़ा तिरपाल लेकर आई और उसने जूतों को ढक दिया। यह एक छोटा सा काम था, लेकिन उस समय वह बहुत ज़रूरी था। अगली सुबह जूते बिल्कुल सुरक्षित थे और यात्री ने खुश होकर दादाजी को अच्छे पैसे दिए। दादाजी ने मीरा को गले लगाकर कहा, 'बेटा, तुम्हारी इस छोटी सी मदद ने आज हमें बहुत बड़ी राहत दी है। यह मदद हमारे लिए दुनिया से भी बड़ी है।'