एक शांत गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। एक दिन स्कूल का प्रोजेक्ट पूरा करते समय अर्जुन की पेंसिल और कागज़ खो गए। वह बहुत परेशान था। तभी उसके दोस्त रोहन ने अपनी जेब से एक छोटी सी पेंसिल और कागज़ का एक टुकड़ा निकालकर उसे दे दिया। वह मदद बहुत छोटी थी, जैसे अनाज का एक दाना, लेकिन उसने अर्जुन का काम बचा लिया।
कुछ दिनों बाद, रोहन के पिता बीमार पड़ गए और उन्हें दवाइयों के लिए पैसों की ज़रूरत थी। अर्जुन को जब यह पता चला, तो वह दौड़कर आया और अपनी गुल्लक से बचाए हुए कुछ पैसे रोहन के पिता को दे दिए। वह रकम बहुत बड़ी नहीं थी, लेकिन उस मुश्किल घड़ी में वह उनके लिए बहुत कीमती थी। रोहन के पिता ने भावुक होकर कहा, 'अर्जुन, यह भले ही छोटी सी राशि हो, लेकिन हमारे लिए यह एक पहाड़ जैसी बड़ी मदद है।' उन्होंने समझा कि मदद का मूल्य उसकी मात्रा में नहीं, बल्कि ज़रूरत के समय उसके महत्व में होता है।