एक छोटे से गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। अर्जुन में चित्रकारी का अद्भुत हुनर था, लेकिन उसका परिवार बहुत गरीब था। एक बार गाँव में एक बड़ी चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की गई। अर्जुन उसमें भाग लेना चाहता था, लेकिन उसके पास रंग और ब्रश खरीदने के लिए पैसे नहीं थे। वह एक पेड़ के नीचे बैठकर उदास होकर रो रहा था।
तभी राघव नाम के एक बुजुर्ग व्यक्ति वहाँ से गुजरे। अर्जुन को रोता देख वे उसके पास आए। जब अर्जुन ने अपनी परेशानी बताई, तो राघव जी ने मुस्कुराते हुए अपने थैले से एक छोटा सा डिब्बा निकाला। उसमें सुंदर रंग और ब्रश थे। उन्होंने कहा, "बेटा, इनसे अपने सपनों के रंग भरो।"
अर्जुन ने उन रंगों से एक बहुत सुंदर चित्र बनाया और प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार जीता। कई साल बीत गए और अर्जुन एक प्रसिद्ध चित्रकार बन गया। एक दिन जब वह अपने गाँव लौटा, तो उसने देखा कि राघव जी अब बहुत वृद्ध और बीमार हो गए हैं। अर्जुन ने बिना देर किए उनकी देखभाल की और उनके इलाज का सारा प्रबंध किया। अर्जुन ने उस व्यक्ति के प्रेम को कभी नहीं भुलाया जिसने उसके दुख के समय में उसका साथ दिया था।