एक छोटे से गाँव में आर्यन नाम का एक युवक रहता था। आर्यन मेहनती तो था, लेकिन उसके मन में एक बुराई थी—वह अक्सर दूसरों की चीज़ों को देखकर लालच करने लगता था। एक दिन उसने गाँव के एक सम्मानित व्यक्ति, सोमनाथ की पत्नी मीरा को देखा। मीरा बहुत ही सरल और सुशील महिला थी और सोमनाथ के साथ उसका जीवन बहुत सुखद था।
आर्यन के मन में मीरा के प्रति एक अनुचित आकर्षण पैदा हो गया। वह भूल गया कि मीरा किसी और की पत्नी है। वह दिन-भर उसी के ख्यालों में खोया रहता और उसे पाने के सपने देखता। इस वजह से उसकी मानसिक शांति छिन गई और वह अपने काम पर ध्यान नहीं दे पा रहा था।
गाँव के एक बुजुर्ग ने आर्यन की बेचैनी देखी और उसे पास बुलाकर समझाया, 'बेटा, जो व्यक्ति धर्म और मर्यादा को जानता है, वह कभी किसी दूसरे की स्त्री या संपत्ति पर बुरी नज़र नहीं डालता। ऐसा करना केवल मूर्खता है।' आर्यन को अपनी गलती का अहसास हुआ। उसे समझ आया कि दूसरों की खुशियों को छीनने की चाहत उसे एक बुरा इंसान बना रही है। उसने अपने विचारों को बदला और ईमानदारी के साथ अपने जीवन में आगे बढ़ा।