एक शांत गाँव में कन्नन नाम का एक युवक रहता था। वह बहुत ही ईमानदार और मेहनती था। उसका एक मित्र था रवि। एक शाम रवि ने कन्नन से कहा, 'कन्नन, क्या तुमने उस अमीर व्यापारी की पत्नी को देखा? वह कितनी शालीन है। उनके बारे में बात करना तो बड़े गर्व की बात होगी।'
कन्नन ने रवि की ओर शांति से देखा और कहा, 'रवि, असली वीरता दूसरों के परिवार और उनके रिश्तों का सम्मान करने में है। किसी दूसरे की पत्नी के प्रति गलत विचार रखना या उन्हें देखना महानता नहीं, बल्कि चरित्र की कमजोरी है।'
गाँव के एक उत्सव के दौरान, जहाँ लोग दूसरों की निजी ज़िंदगी के बारे में गपशप कर रहे थे, रवि ने फिर से कन्नन को उकसाने की कोशिश की। लेकिन कन्नन अडिग रहा। उसने अपनी मर्यादा बनाए रखी और सभी के प्रति सम्मानजनक व्यवहार किया। गाँव के बुजुर्गों ने कन्नन के इस संयम को देखा और उसकी प्रशंसा की। उन्होंने समझा कि असली ताकत शरीर में नहीं, बल्कि मन को नियंत्रित करने और दूसरों के घर की पवित्रता का सम्मान करने में है।