एक शांत गाँव में आर्यन नाम का एक युवक रहता था। आर्यन मेहनती तो था, लेकिन जीवन में छोटी-मोटी गलतियाँ अक्सर कर बैठता था। उसके पड़ोसी विक्रम अपनी पत्नी मीरा के साथ रहते थे। मीरा एक बहुत ही दयालु महिला थी जो अपने घर और परिवार का बहुत सम्मान करती थी।
एक बार आर्यन एक कठिन समय से गुजर रहा था। मीरा ने बड़े ही स्नेह और करुणा के साथ उसकी मदद की। मीरा के इस व्यवहार और उसके सरल स्वभाव ने आर्यन को प्रभावित किया। एक पल के लिए उसके मन में एक गलत विचार आया, 'काश मीरा मेरी जीवनसंगिनी होती।'
लेकिन जब उसने विक्रम और मीरा को एक-दूसरे के प्रति सम्मान और प्रेम के साथ रहते देखा, तो आर्यन को अपनी गलती का अहसास हुआ। उसने समझा कि भले ही वह अन्य कार्यों में चूक कर जाए, लेकिन किसी दूसरे के वैवाहिक जीवन और उसके सम्मान की इच्छा करना सबसे बड़ा पाप है। उसने उस विचार को त्याग दिया और एक चरित्रवान व्यक्ति बनने का संकल्प लिया।