एक छोटे से गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। वह बहुत ही शांत और दयालु स्वभाव का था। उसका एक दोस्त था, रोहन, जो बहुत ही गुस्सैल और बदतमीज था। एक दिन, अर्जुन ने बड़े गर्व से अपने हाथों से बनाई हुई एक मिट्टी की मूर्ति सबको दिखाई।
रोहन ने उसे देखते ही उपहास करते हुए चिल्लाकर कहा, "कितनी गंदी मूर्ति है! इसे देखकर तो घिन आती है!" गाँव के सभी लोग अर्जुन की प्रतिक्रिया देखने लगे। अर्जुन को बहुत गुस्सा आया, उसका मन हुआ कि वह रोहन को भी कड़वे शब्द कहे। लेकिन उसने अपनी आँखें बंद कीं और खुद को शांत किया।
अर्जुन ने बहुत ही विनम्रता से कहा, "कोई बात नहीं रोहन, अगर तुम्हें यह पसंद नहीं है तो मैं इसे रख लेता हूँ।" उसने झगड़ा नहीं किया। अर्जुन की इस सहनशीलता को देखकर बड़े-बुजुर्ग बहुत प्रभावित हुए। रोहन को अपनी गलती का एहसास हुआ और वह शर्मिंदा हो गया। अर्जुन ने साबित कर दिया कि शांति में कितनी ताकत होती है।