एक छोटे से गाँव में सैम और उसके पिता थॉमस रहते थे। थॉमस एक मेहनती किसान था। एक दिन खेत में काम करते समय, थॉमस को मिट्टी के नीचे दबा हुआ एक पुराना धातु का संदूक मिला। जब उसने उसे खोला, तो उसकी आँखें फटी की फटी रह गईं—वह सोने के सिक्कों से भरा था!
उसके पड़ोसी रवि ने फुसफुसाते हुए कहा, "थॉमस, इसे रख लो! किसी को पता नहीं चलेगा। इससे तुम्हारी किस्मत बदल जाएगी!" थॉमस ने शांति से उत्तर दिया, "रवि, यह सोना मेरी मेहनत की कमाई नहीं है। दूसरों की संपत्ति पर लालच करना सही नहीं है। यह जिसका भी है, उसे वापस मिलना चाहिए।"
थॉमस वह संदूक गाँव के मुखिया के पास ले गया। पता चला कि वह संदूक सालों पहले खो गया था और एक अमीर व्यापारी का था। थॉमस की ईमानदारी देखकर व्यापारी बहुत खुश हुआ। उसने थॉमस को खेती के लिए उपजाऊ जमीन और सैम की पढ़ाई के लिए धन उपहार में दिया। सैम ने उस दिन सीखा कि जो लोग दूसरों की चीज़ों का लालच नहीं करते, समृद्धि खुद उनके पास आती है।