एक सुंदर से गाँव में कार्तिक और माधव नाम के दो दोस्त रहते थे। कार्तिक की एक बुरी आदत थी—दूसरों की पीठ पीछे उनकी बुराई करना। एक दिन, जब गाँव में उत्सव की तैयारियाँ चल रही थीं, कार्तिक ने कुछ लोगों से कहा, 'माधव बहुत सुस्त है, वह कभी कोई काम ठीक से नहीं कर पाता।'
यह सुनकर गाँव वालों के मन में माधव के प्रति गलत धारणा बन गई। माधव को यह सुनकर बहुत दुख हुआ, लेकिन उसने कार्तिक से झगड़ा नहीं किया। उसने बस शांति से अपना काम करना जारी रखा और सबके साथ अच्छा व्यवहार किया।
कुछ दिनों बाद, गाँव में एक बहुत ही कठिन काम आया जिसे करने के लिए बहुत धैर्य और कुशलता की ज़रूरत थी। कार्तिक ने कोशिश की, लेकिन वह हार मान गया। वहीं माधव ने अपनी मेहनत और लगन से उस काम को बहुत ही खूबसूरती से पूरा कर दिया। तब गाँव वालों को समझ आया कि कार्तिक की बातें गलत थीं। माधव के अच्छे स्वभाव और उसके काम ने उसे सबका प्रिय बना दिया। कार्तिक को अपनी गलती का अहसास हुआ। माधव ने साबित कर दिया कि पीठ पीछे बुराई करने वालों से कहीं बढ़कर वे लोग होते हैं जो अपने अच्छे कर्मों से दुनिया का दिल जीत लेते हैं।