एक छोटे से गाँव में करी नाम का एक लड़का अपने माता-पिता के साथ रहता था। करी बहुत ही होनहार लड़का था, लेकिन उसमें एक कमी थी—जब भी वह कोई गलती करता, उसे छिपाने की कोशिश करता था।
एक दोपहर, करी अपने दोस्त अर्जुन के साथ खेल रहा था। खेलते-खेलते अचानक करी के हाथ से अर्जुन की पसंदीदा लकड़ी की नाव टूट गई। अर्जुन उस समय वहाँ नहीं था। करी डर गया और उसने सोचा, 'अगर मैंने सच बताया तो सब मुझे डाँटेंगे, क्यों न इसे झाड़ियों में छिपा दूँ?'
लेकिन उस रात करी को नींद नहीं आई। उसके मन में एक अजीब सी बेचैनी थी। उसे महसूस हुआ कि उसने कुछ गलत किया है। अगले दिन सुबह, करी ने हिम्मत जुटाई और अर्जुन के पास जाकर उसे पूरी बात सच-सच बता दी। अर्जुन को अपनी नाव टूटने का दुख तो हुआ, लेकिन करी की ईमानदारी देखकर उसने उसे माफ कर दिया।
करी के पिता ने उसे गले लगाकर कहा, 'बेटा, गलतियाँ करने से बेहतर है कि हम गलत काम करने से बचें। जो व्यक्ति बुराई के रास्ते पर नहीं चलता, वही वास्तव में सुरक्षित रहता है।' उस दिन के बाद से, करी ने हमेशा सच्चाई के रास्ते पर चलने का संकल्प लिया।