एक शांत गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। उसके पिता, माधव, एक साधारण किसान थे। अर्जुन अक्सर अपने पिता को कड़ी मेहनत करते देखता था। एक शाम अर्जुन ने पूछा, 'पिताजी, आप इतनी मेहनत क्यों करते हैं? आपके पास न तो बहुत धन है और न ही कोई बड़ा नाम।'
माधव ने मुस्कुराते हुए कहा, 'अर्जुन, नाम या प्रसिद्धि का अर्थ केवल धन कमाना नहीं है। हमारे द्वारा किए गए अच्छे कार्य ही हमारी असली पहचान होते हैं। आज मैं जो पौधा लगा रहा हूँ, वह कल एक बड़ा पेड़ बनेगा और थके हुए मुसाफिरों को छाया देगा। वही छाया ही मेरी प्रसिद्धि होगी।'
वर्ष बीतते गए और अर्जुन एक कुशल डॉक्टर बन गया। एक बार गाँव में एक भयंकर बीमारी फैल गई। अर्जुन ने अपने धन और सुख की चिंता किए बिना, गाँव के हर व्यक्ति का मुफ्त में इलाज किया। उसकी निस्वार्थ सेवा से गाँव के लोग ठीक हो गए और सबने अर्जुन की बहुत प्रशंसा की। तब अर्जुन को अपने पिता की बात समझ आई। उसने जाना कि इस दुनिया में जन्म लेना तभी सार्थक है जब हम अपने अच्छे गुणों से दूसरों के काम आ सकें।