एक शांत गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। वह बहुत ही पढ़ाकू था और उसने कला, रंगों और तकनीकों पर कई बड़ी-बड़ी किताबें पढ़ी थीं। उसे पूरा विश्वास था कि इन किताबों के ज्ञान से वह दुनिया का सबसे महान चित्रकार बन जाएगा।
गाँव में एक बड़ी चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित की गई। अर्जुन अपनी सबसे अच्छी तूलिकाएं और महंगे रंग लेकर आया। उसने किताबों में सीखी हुई हर बारीकी का इस्तेमाल करते हुए एक अद्भुत चित्र बनाना शुरू किया। लेकिन जैसे ही वह चित्र पूरा करने वाला था, अचानक हवा के एक झोंके से उसका पानी का पात्र पलट गया और उसका पूरा चित्र खराब हो गया। अर्जुन बहुत निराश होकर बैठ गया।
वहीं पास में, रवि नाम का एक लड़का बैठा था, जिसने कभी कोई कला की किताब नहीं पढ़ी थी और न ही उसने कोई प्रशिक्षण लिया था। वह बस एक लकड़ी के टुकड़े पर कोयले से चित्र बना रहा था। लेकिन उसके हाथों में एक ऐसी प्राकृतिक कला थी कि उसका साधारण सा चित्र भी देखने वालों का मन मोह रहा था। अर्जुन को उस दिन समझ आया कि हम चाहे कितनी भी पढ़ाई क्यों न कर लें, जीवन में भाग्य का अपना एक अलग ही स्थान और प्रभाव होता है।