एक छोटे से गाँव में आर्यन नाम का एक मेहनती युवक रहता था। वह अपने खेतों से बहुत प्यार करता था, लेकिन भाग्य को कुछ और ही मंजूर था। एक साल भीषण सूखा पड़ा और उसकी सारी फसलें बर्बाद हो गईं। आर्यन टूट गया। उसने सोचा कि अब जीवन में कुछ नहीं बचा है, इसलिए वह सब कुछ त्याग कर संन्यासी बनने का निर्णय लेने लगा।
जब वह अपना सामान बाँध रहा था, तब उसकी माँ मीरा ने उसे रोका। माँ ने कहा, 'बेटा, दुख के बादल घने हैं, पर वे छँट भी जाते हैं। तुम सब छोड़कर जाना चाहते हो क्योंकि तुम दुखी हो, लेकिन अगर भाग्य तुम्हें इस संघर्ष से लड़ने की शक्ति दे दे, तो तुम फिर से सब कुछ पा सकते हो।' आर्यन रुक गया। उसने सोचा कि क्या वह हार मान ले या फिर से कोशिश करे। उसने हार न मानने का फैसला किया। उसने कड़ी मेहनत की और अगले साल उसकी फसल बहुत अच्छी हुई। भाग्य ने बाधाएँ तो डालीं, पर उसने जीवन का त्याग नहीं किया।