एक छोटे से गाँव में अर्जुन और लियो नाम के दो दोस्त रहते थे। अर्जुन को नई चीज़ें सीखने और किताबें पढ़ने का बहुत शौक था। वहीं लियो को लगता था कि पढ़ाई में समय बर्बाद करने से अच्छा है खेलना। वह अक्सर कहता, 'पढ़ाई की क्या ज़रूरत है? खेलकूद ही काफी है!'
एक बार गाँव के मुखिया ने एक बागवानी प्रतियोगिता आयोजित की। जीतने वाले को एक सुंदर बगीचा इनाम में दिया जाना था। अर्जुन ने मिट्टी की गुणवत्ता और बीजों के बारे में बहुत कुछ पढ़ा और सीखा। लेकिन लियो ने बिना कुछ सोचे-समझे बस ज़मीन पर बीज डाल दिए। कुछ ही दिनों में, लियो की ज़मीन सूखकर बंजर हो गई क्योंकि उसने सही तरीके से पानी और देखभाल नहीं की थी। दूसरी ओर, अर्जुन का बगीचा फूलों और फलों से लद गया था।
लियो को उदास देखकर मुखिया ने कहा, 'लियो, ज्ञान के बिना मनुष्य उस बंजर भूमि की तरह है जो केवल अस्तित्व में तो है, पर कुछ पैदा नहीं कर सकती। बिना बुद्धि के इंसान का जीवन व्यर्थ है।' लियो को अपनी गलती समझ आ गई और उसने सीखने का संकल्प लिया।