एक छोटे से गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। अर्जुन बहुत फुर्तीला था, लेकिन उसकी एक बुरी आदत थी—वह किसी भी बात को आधा सुनकर ही दूसरों को बताने लगता था। एक दिन, उसने गाँव के बुजुर्ग को एक खास पौधे के बारे में बात करते सुना। अर्जुन ने केवल इतना सुना, 'वह पौधा... सावधान रहना... वह बहुत कड़वा है...' उसने सोचा कि वह पौधा ज़हरीला है।
अगले दिन, अर्जुन अपनी सहेली मीरा के पास भागा और चिल्लाकर बोला, 'मीरा, उस पौधे के पास मत जाना! वह बहुत खतरनाक है!' मीरा डर गई और उसने उस रास्ते पर जाना छोड़ दिया। अर्जुन की इस जल्दबाजी से गाँव के अन्य बच्चे भी डर गए। थोड़ी देर बाद, बुजुर्ग वहाँ आए और उन्होंने अर्जुन को समझाया, 'अर्जुन, किसी भी बात को पूरी तरह सुनकर समझना बहुत ज़रूरी है। यदि तुम अधूरी जानकारी के आधार पर बोलोगे, तो तुम सच के बजाय भ्रम फैलाओगे।' अर्जुन को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने वादा किया कि वह अब से कुछ भी बोलने से पहले पूरी बात ध्यान से सुनेगा।