एक छोटे से गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। उसे नई बातें सुनना बहुत पसंद था। एक दिन उसके दोस्त रोहन ने दौड़ते हुए आकर कहा, 'अर्जुन! उस पुराने बरगद के पेड़ के नीचे एक चांदी की चाबी छिपी है!' अर्जुन खुशी-खुशी पेड़ के पास गया, लेकिन उसे वहाँ कुछ नहीं मिला।
अगले दिन गाँव के बुजुर्ग, राघव जी ने कहा, 'उस बरगद के पेड़ के नीचे बैठना बहुत अच्छा है, वहाँ बहुत ठंडी हवा चलती है।' अर्जुन उलझन में पड़ गया। 'रोहन ने चांदी की चाबी के बारे में बताया, और राघव जी हवा के बारे में कह रहे हैं। सच क्या है?'
उस रात अर्जुन ने अपनी माँ, माया से पूछा, 'माँ, हमें कैसे पता चलेगा कि कौन सच बोल रहा है?' माँ ने प्यार से समझाया, 'अर्जुन, कोई भी कुछ कहे, उसे आँख बंद करके नहीं मानना चाहिए। तुम्हें खुद जाकर देखना चाहिए और सच्चाई का पता लगाना चाहिए।' अगले दिन अर्जुन फिर से उस पेड़ के पास गया। वहाँ चाबी तो नहीं थी, लेकिन राघव जी की बात सच थी—वहाँ बहुत ठंडी और सुखद हवा चल रही थी। अर्जुन समझ गया कि बुद्धिमानी इसी में है कि हम किसी की भी बात पर आँख मूँदकर विश्वास न करें, बल्कि सच्चाई की जाँच करें।