एक सुंदर से गाँव में अशोक नाम का एक युवक रहता था। उसके पास भेड़ पालने का एक छोटा सा फार्म था। उसकी भेड़ें बहुत स्वस्थ थीं और उनका व्यापार बहुत अच्छा चल रहा था। अशोक अपनी समृद्धि से बहुत खुश था।
एक दिन उसका मित्र रवि उससे मिलने आया। फार्म को देखते हुए रवि ने एक बात गौर की। 'अशोक, बाड़े की लकड़ी में एक छोटा सा छेद है। तुम्हें इसे तुरंत ठीक कर देना चाहिए,' रवि ने सलाह दी।
लेकिन अशोक ने इसे हल्के में लिया। 'यह तो बस एक छोटा सा छेद है, रवि! इससे भेड़ों को क्या होगा?' उसने हँसते हुए कहा। उसने उस छेद पर ध्यान नहीं दिया और अपने अन्य कामों में व्यस्त रहा।
कुछ दिनों बाद, एक रात बहुत तेज़ तूफान आया। तेज़ हवा और बारिश के कारण वह छोटा सा छेद बड़ा हो गया। अंधेरे का फायदा उठाकर एक भूखा भेड़िया उस छेद के रास्ते अंदर घुस आया। अगली सुबह जब अशोक उठा, तो उसने देखा कि भेड़िया उसकी अधिकांश भेड़ें ले गया था। उसकी आजीविका और खुशी एक ही रात में खत्म हो गई।
अशोक को अपनी गलती का अहसास हुआ। उसने महसूस किया कि एक छोटी सी कमी को नज़रअंदाज़ करना कितना भारी पड़ सकता है। उसने सीखा कि छोटी गलतियों को सुधारना क्यों ज़रूरी है, वरना वे सब कुछ नष्ट कर सकती हैं।