एक सुंदर से गाँव में कविन नाम का एक लड़का रहता था। वह बहुत ही दयालु था, लेकिन उसके कुछ दोस्त हमेशा दूसरों का मज़ाक उड़ाते थे और झूठ बोलते थे। एक दिन, उन दोस्तों ने गाँव के एक बुजुर्ग व्यक्ति को परेशान करने की योजना बनाई। कविन को यह बात बिल्कुल पसंद नहीं आई। उसने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन दोस्तों ने उसे 'डरपोक' कहकर चिढ़ाया।
कविन बहुत दुखी होकर घर लौट आया। उसके पिता ने उसे समझाते हुए कहा, 'बेटा, अपने मन की अच्छाई को बचाकर रखना। अगर तुम अच्छे लोगों के साथ रहोगे, तभी तुम्हें सम्मान और खुशियाँ मिलेंगी।'
कविन ने अपने पिता की बात मान ली। उसने उन गलत दोस्तों का साथ छोड़ दिया और गाँव के उन बच्चों के साथ समय बिताना शुरू किया जो पढ़ाई और मदद करने में विश्वास रखते थे। उन सबने मिलकर गाँव में एक छोटी सी लाइब्रेरी बनाई। धीरे-धीरे, कविन के अच्छे व्यवहार और काम की वजह से पूरे गाँव के लोग उसे प्यार और सम्मान देने लगे। कविन समझ गया कि अगर वह उन गलत दोस्तों के साथ रहता, तो उसे कभी यह सम्मान नहीं मिलता।