एक छोटे से गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का अपने पिता के साथ रहता था। उसके पिता हमेशा कहते थे, 'अर्जुन, जो काम नहीं करना चाहिए उसे कभी मत करना, और जो काम करना ज़रूरी है उसे कभी मत छोड़ना।' एक दिन खेलते समय अर्जुन को झाड़ियों में एक सुंदर घड़ी मिली। उसे लगा कि अगर वह इसे रख लेगा, तो वह बहुत खुश रहेगा। लेकिन उसके मन में एक डर था कि यह किसी और की होगी।
उसी समय, अगले दिन स्कूल में एक विज्ञान प्रतियोगिता होने वाली थी। अर्जुन को उसके लिए तैयारी करनी थी। अगर वह घड़ी के बारे में सोचता रहता, तो वह अपनी तैयारी नहीं कर पाता। अर्जुन ने सोचा, 'गलत काम करना मुझे दुखी कर देगा।' उसने वह घड़ी स्कूल के ऑफिस में जमा कर दी। घड़ी वापस मिलने पर जिसका भी वह सामान था, वह बहुत खुश हुआ। अर्जुन को भी बहुत सुकून मिला। इसके बाद, अर्जुन ने पूरी मेहनत से अपनी प्रतियोगिता की तैयारी की और प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया। अगर उसने घड़ी चुराई होती तो उसे पछतावा होता, और अगर वह तैयारी नहीं करता तो वह अवसर खो देता।