एक शांत गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। उसे अपने बगीचे में खेलना बहुत पसंद था। एक दिन, उसने देखा कि तेज़ हवा के कारण बगीचे का पुराना आम का पेड़ झुक रहा है। अर्जुन ने सोचा कि उसे तुरंत इसे ठीक करना चाहिए।
अर्जुन एक कुल्हाड़ी लेकर पेड़ की ओर भागा। तभी उसके दादाजी, कधिर ने उसे रोका। 'रुको अर्जुन! कोई भी काम शुरू करने से पहले तुम्हें चार चीज़ों को तौलना चाहिए,' दादाजी ने कहा।
'वे क्या हैं दादाजी?' अर्जुन ने पूछा।
'पहला, वह काम कितना कठिन है? दूसरा, क्या तुम्हारे पास उसे करने की शक्ति है? तीसरा, पेड़ की जड़ें और मिट्टी कितनी सख्त हैं (यानी बाधाएं कितनी बड़ी हैं)? और चौथा, क्या तुम्हारी मदद के लिए तुम्हारे दोस्त साथ हैं?' दादाजी ने समझाया।
अर्जुन रुक गया और सोचने लगा। उसने महसूस किया कि पेड़ बहुत भारी है और उसकी जड़ें ज़मीन में बहुत गहराई तक धंसी हुई हैं। उसने अपने दोस्तों, रवि और कपिल को बुलाया। सबने मिलकर योजना बनाई और सावधानी से काम किया। अर्जुन की सूझबूझ से पेड़ सुरक्षित बच गया।
अर्जुन ने सीखा कि बिना सोचे-समझे किया गया काम नुकसान पहुँचा सकता है, जबकि योजना बनाकर किया गया काम सफल होता है।