एक शांत गाँव में आर्यन नाम का एक लड़का रहता था। आर्यन को बड़ी-बड़ी बातें करने की आदत थी। एक दिन गाँव के तालाब में नावों की दौड़ होने वाली थी। आर्यन ने बड़े गर्व से कहा, 'जब मैं बड़ा हो जाऊँगा, तो मैं दुनिया का सबसे बड़ा जहाज़ बनाऊँगा और अकेले ही समुद्र की लहरों से लड़ूँगा!'
उसके दोस्त लियो ने उसे समझाया, 'लेकिन आर्यन, बड़े जहाज़ के लिए मज़बूत लकड़ी और सही कौशल की ज़रूरत होती है।' पर आर्यन ने उसकी बात अनसुनी कर दी। कुछ दिनों बाद, गाँव में एक छोटी सी नाव प्रतियोगिता हुई। अपनी बहादुरी दिखाने के लिए, आर्यन ने लकड़ी के कुछ ढीले तख्तों को रस्सी से बाँधकर एक नाव बनाई। वह दूर से तो बड़ी लग रही थी, पर अंदर से बहुत कमज़ोर थी।
आर्यन अपनी नाव लेकर पानी में उतरा। शुरुआत में सब ठीक था, लेकिन जैसे ही वह तालाब के बीच में पहुँचा, पानी की एक लहर आई। उसकी नाव का ढांचा इतना कमज़ोर था कि वह बीच में ही टूट गई! आर्यन घबरा गया और किसी तरह एक किनारे की टहनी पकड़कर बचा। उस दिन उसे समझ आया कि केवल जोश से काम नहीं चलता, काम शुरू करने से पहले अपनी शक्ति और तैयारी को परखना बहुत ज़रूरी है।