एक शांत घाटी में आर्यन नाम का एक युवक रहता था। जब उसके पिता का निधन हुआ, तो आर्यन को एक बड़ा बाग और बहुत सारा धन विरासत में मिला। आर्यन बहुत खुश था, लेकिन उसमें एक बड़ी कमी थी: उसे अपनी संपत्ति का सही अंदाज़ा नहीं था। उसे यह नहीं पता था कि उसके पास कितना धन है और उसे कितना खर्च करना चाहिए।
शुरुआत में, आर्यन अपने दोस्तों के लिए भव्य दावतें आयोजित करता था। वह गर्व से कहता, 'चिंता मत करो! हमारे पास इतना धन है कि हम जो चाहें खर्च कर सकते हैं!' उसने महंगे रेशमी कपड़े और सोने के गहने खरीदे। गाँव वालों को लगता था कि आर्यन पहले से भी अधिक समृद्ध हो गया है।
लेकिन धीरे-धीरे स्थिति बदलने लगी। एक साल घाटी में भीषण सूखा पड़ा और फसलें बर्बाद हो गईं। सामान्यतः, आर्यन को अपने संकट के समय के लिए बचत का उपयोग करना चाहिए था। लेकिन जब उसने अपना खजाना देखा, तो वह लगभग खाली था। उसके विलासितापूर्ण जीवन ने चुपचाप उसकी नींव को खोखला कर दिया था।
अंत में, उसे अपना घर और ज़मीन बेचने की नौबत आ गई। तब आर्यन को समझ आया कि जो व्यक्ति अपनी संपत्ति की सीमा को नहीं जानता, उसका जीवन बाहर से समृद्ध दिखने के बावजूद अंदर से नष्ट हो रहा होता है। उसने अपनी गलती सुधारी और भविष्य में समझदारी से खर्च करने का संकल्प लिया।