एक छोटे से गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। उसे बागवानी का बहुत शौक था। उसके दादाजी एक अनुभवी किसान थे। एक बार, अर्जुन ने अपने बगीचे में बीज बोने का फैसला किया। उत्साह में आकर, उसने दोपहर की चिलचिलाती धूप में मिट्टी खोदकर बीज बो दिए।
लेकिन कुछ ही दिनों में, वे नन्हे पौधे कड़ी धूप के कारण सूख गए। अर्जुन बहुत दुखी हुआ और रोने लगा। 'मैंने सब कुछ सही किया, फिर भी मेरे पौधे क्यों नहीं बढ़े?' उसने पूछा।
उसके दादाजी उसके पास आए और प्यार से बोले, 'अर्जुन, तुमने सही बीज तो चुने, लेकिन क्या तुमने सही समय चुना?' दादाजी ने समझाया, 'पौधों को बढ़ने के लिए सुबह की ठंडक या शाम के शांत समय की जरूरत होती है। साथ ही, हमें बारिश के मौसम के आने से पहले तैयारी कर लेनी चाहिए।'
अर्जुन को अपनी गलती समझ आ गई। अगली बार, उसने बारिश का मौसम शुरू होने से पहले, सुबह के ठंडे समय में सही औजारों के साथ बीज बोए। कुछ ही हफ्तों में, उसका बगीचा फूलों और हरियाली से भर गया। उसने सीख लिया कि यदि सही समय पर सही साधनों का उपयोग किया जाए, तो कोई भी काम कठिन नहीं होता।